देखो देखो वक्त के रूप भी देखो।
कभी मरहम लगता
तो कभी गहरे घाव दे जाता।
कभी ये हँसता
तो कभी ये रुलाता।
देखो देखो इस वक्त के खेल निराले देखो।
कभी ये मिलाता
तो कभी ये दूरियां बढ़ाता।
कभी कोई हारा है इससे
तो कभी कोई जीता है इससे
जिसने भी वक्त की मार को है झेला
उसी ने इस वक्त के रहस्य को है जाना।
Rk ki kalam se
