मैं चिराग

​जिस राह पर हर बार मुझे अपना कोई छलता रहा !!

फिर भी ना जाने क्यूँ मै उस राह ही चलता रहा !!

सोचा था बहुत इस बार रोशनी नहीं—धुआँ दूँगा !!

लेकिन चिराग था—फ़ितरत से

जलता रहा—जलता रहा !!!!

Rk ki kalam se

Pain

​मेरा दर्द ही इतना बेदर्द निकला।

एक दर्द के बाद दूसरा दर्द दे निकला।

अब दर्द को बेदर्दी से बहार निकाले मैं भी बेदर्द हो निकला।

उम्मीद

​उम्मीद से ही उम्मीद टूटी,

तो उम्मीद से क्या उम्मीद करूँ।

उम्मीद से ही दुनिया चलती,

फिर भी दुनिया से क्या उम्मीद करूँ।

Rk ki kalam se

Heart crack

​मैंने मोहब्बत से मोहब्बत से ज्यादा मोहब्बत की

मुझे मोहब्बत के बदले मोहब्बत न मिली।

मोहब्बत ने किसी और से मोहब्बत की।

मैंने भी मोहब्बत की मोहब्बत से मोहब्बत की।

Rk ki kalam se

True & false

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प्रत्यछ ही अप्रत्यछ है

और अप्रत्यछ ही प्रत्यछ है।

प्रत्यछ में अप्रत्यछ देखो 

और अप्रत्यछ में प्रत्यछ देखो।

फिर सच और झूट में सारा सच प्रत्यछ है।

Rk ki kalam se

Value of time

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वक्त का काम किया अगर वेवक्त

तो वक्त तुम्हे वेवक्त कर देगा।

वक्त से किया जो खिलवाड़ 

तो वक्त तुम्हे खेल समझ कर खेलेगा।

Rk ki kalam se

बक्त

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देखो देखो वक्त के रूप भी देखो।

कभी मरहम लगता

तो कभी गहरे घाव दे जाता। 

कभी ये हँसता 

तो कभी ये रुलाता।

देखो देखो इस वक्त के खेल निराले देखो।

कभी ये मिलाता

तो कभी ये दूरियां बढ़ाता।

कभी कोई हारा है इससे 

तो कभी कोई जीता है इससे 

जिसने भी वक्त की मार को है झेला 

उसी ने इस वक्त के रहस्य को है जाना।

Rk ki kalam se

टाइममशीन और इतिहास

 

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मेरे परिवार के प्रियजन(मेरे परिवार का तात्पर्य पूरे देश के नागरिको से है।) हकीकत में हमें पढ़ाये जाने वाला इतिहास, और प्रत्यक्ष प्रमाण और इतिहास के महान लेखकों के लिखे लेखों के बीच हम सभी को अंतर करना कितना कठिन हो चुका है। और ऐसे में एक बच्चे के शब्दों ने मुझे हिला ही दिया।
मैं एक दस साल के मासूम बच्चे से बात कर रहा था। मैंने पूछा बेटा क्या बनना है। वो तपाक से बोलता बहुत बड़ा वैज्ञानिक बनना है। हालांकि मैं हिंदी में लिख रहा हूँ। वो इंग्लिश शब्दों का इस्तेमाल कर रहा था। बच्चा मासूम था इसलिए मैंने उससे और बात करने की इच्छा से पूछा वैज्ञानिक ही क्यू बनना कुछ और क्यू नहीं। वो बोला मुझे टाइममशीन बनाना है। मैं चौका इतने छोटे बच्चे के दिमाग में टाइममशीन बनाने का विचार! मैने पूछा क्यू ! बच्चा बोला “हमें अपना इतिहास देखना है। क्युकि लोग कहते कुछ हैं। और किताबो में लिखा कुछ है।”
मैं उसकी बात सुन कर मैं शान्त हो गया। क्युकि मैं खुद अपने इतिहास को लेकर गुमराह हूँ। तो मैं उसे क्या समझाऊँ कि हमारा इतिहास क्या है। मुझे तो यही लगता है। हमारे कुछ बुद्धजीवों ने अपने फायदे के लिए इतना तोड़ मरोड़ दिया की सत्य और असत्य का पता भी नहीं लगता। क्या ये देश तुंम्हारा नहीं। क्या जो अपने फायदे के लिए देश के इतिहास से खेल गए। या मैं तुम्हे देश द्रोही के नाम से जानू। ख़ैर इस नाम में कोई बुराई नहीं। मुझे नहीं पता क्या है मुग़ल और ब्रिटिश शासन के बाद तुंम्हारे विचार।  चलो आज नहीं तो कल कोई न कोई आयेगा तुम्हे भी बदनाम करेगा देश के इतिहास में। लेकिन मैं उस बच्चे को उसे उसके इस काम के लिए भविष्य में सफल होने का आशीर्वाद भी नहीं दे सकता। क्युकि अगर ऐसा होता है। तो जाने कितने देश के नागरिको ठेश पहुँचेगी। जिन्हें वो नायक समझते थे वो ही खलनायक निकले। लेकिन मैं उसके बेहतर भविष्य की कामना करता हूँ।
#ऋषी_की_कलम_से